भावप्रकाश सटीक की भूमिका

इतसंसारनें धम्मे भे काम मोक्ष वदी चारं मनुप्य जन्मफे मुख्य फलं ओर शरददी इन चररोका सुरुय साधनेहे क्योकि कदा कि ( धमोर्थकाममोक्षाणां श्रतापनंयततः इत्यादि इसे , दरीरफी रक्षा करना भ्रोर शरीरको स्वस्थ रखना मनुष्यमात्र का सुर्य फतेग्य है क्योकि जवर मतु- ` प्या शसंर सादथान नदं दोताद तव एेदिक भौर पारलौकिक कोडभी कार्यं नही सत्ता इसीसे हमारे प्राचीन मदपियोँ ने चिकिस्सा शाखके भ्रनेक यन्थ वनाये मोर अनेक विदान्‌ मनुरप्योनि भी श्रपनी व॒द्धिफे भनुतार वयक शासक ्ननेक यन्थ वनाये यद्‌ वात सर्वसाधारण दै कि एकमनुप्य ¦ की युद्धि प्रायः एकदी विषयमने वहत त्तत्र दोतीहै इसतते इन यन्थों में किसीका निदान किसकी चिक्षिस्ता किसी का. शारीरक किसी का स॒त्रस्यान वहुत उत्तम समण्ताजाता है इसङारण जो मनुप्य व्यक शार के सीखने की इच्छा करे उसे इनमसव यन्थों के पटने की शावदयकता होती टै भौर जो मनुष्य सम्पण यरन्योको नदीं देखते देँ वह पूरालाम नदी,उठासक्ते परन्तु जिनको थोड़ा भवकारदै भोर धोड़ादी चत करसक्ते है वद विचारे इन भनेक वहुत हदत्‌ पन्यो को पठकर फते वेद्य शासको भल्ीभांति जानसके इसवातफो विचारकर श्रीमान्‌ भादमिन्नने सम्पूर्णं ऋपि प्रणीत हदत्‌ मन्धोति जिसका जोनसाभाग भद्युत्तम भ्रौर भति उपकारीया वह्‌ जकर भावक्रार नाम सेपदका अथ नाया इसयंयमें येद्यफकी उत्पतिते लेकर सम्पण शारीरकः, श्नौपथिर्यो फे गुण दोप सगो फी उत्ति लक्षण यल्ल भौर वाजीकरण भादिक अनेक विपयों फा विस्तार पूर्व्धक वणीन हे इसीसे इस देरमें इसयेयका द्डामान होकर वडा प्रचारहुमा भनेक गुणों ते पूणे यद यथ रल सेष्ठत वाणी दै भोर आजकल समयके प्रभावस्ते भ्रन्य लोगोकी तौ कोनकदै प्रायः वेद्यस्तोमभी संश्छेत नदीं जानते इसकारणते उन लोोको इतनी दैक्तिभी नहीं होती है इस एकदी यथको प्रकर चिकित्सा शार सम्पूण विपयोको. भच्छे प्रकारे जान इससे बिना नानेन्रमे यदलोग प्रपने पटक पालनेके लिये च्यापव तते करतद्ा द्मररागाभा रगान्ने व्याङल्लदः मे साचारास उनके पास भाराम होनेके ज्तिये भरते मर वैयलोगभी उन श्रे दोनेके लिये भोपयदेते दँ परंतु ५. प्रायः उसका फल इसके विपरीत होता इत दु्दाको देखफर परम कारुणिक धम्मधुरीण मुण- र्मव वदावतंतत मुन्छीनवलकिशोरं सी-माई.द-की याज्ञे गरा निवाश्ति ललनरऊ केनि- संस्छत भण्यापक गोड़वंदावतंस चौराततिया पंडित कालीचरण शमनी ने सखनठः के वाजपेय क्षमापत्तिजी की सदायताते परम उपकारी मावप्रराश नाम इतत चयक यन्या द्‌ फिया दशतयी भाषा करनेमे उक्त मदादयोनि वदरुतसी छर्पाहुदं तपा लिलीहुदं माव- भकाशचरी पुस्तकोको देखकर भर जिन यन्योके धरमाण इत अन्यम हे उनमे ते जरात निलसङ्ग

य्‌ * भावग्रकादा सटीक फी नमिरा।

= = +

उनकोभीं इकटाररके भौर चनेरू फोपोकोनी एकत्रित करके इसक्ते पाठ भेदके दूर फरने मे दनोः पियोके भाषा नान जाननेमे चोर मूल प्रतिक णुद करनेमें वडा मरम कियादे अव रोद मदातुभाः यद सन्देह करं फि इत्तका भायानुवाद तो कम्ब रादि नमते में छदी चका किर इत पिः पेणका स्या ध्रपोजनदै यदश्रम इसक्लिये कियागया दै कि भ्रवतक जो फोदं चनुवाद मुद्रित दए यद एकतो धदुमूस्य शोर दूसरे उनकी मापाभी सर्व सापारणको लाभदायी नदीं है इससे भव्यम मनोदर तरल प्रोर शुदभापा में यद भनुचाद्‌ करफे मूलसदिते मुद्रित फराया है प्रच सम्पूण गुण यादी सञ्जनेति यद प्राथनादि कि इसददत्‌ यके मनुवाद करने में जदारुदीं जोक विगम उप्ते यद्‌ सममकर क्षमाकरं कि भूलना मनुप्पोका स्वाभाविक परम्प हे

इति (॥

भवधकाश सदीकपूषैखरडके परथममायका सुदीप

` क्ष प्य छन श्चा ्ना्राव्ला- मंगलाचस्णभ्रादि प्तकरृत्य ठसगभोधान मेँ ्रायर्ैदपा लक्षय [निष्ट शरोर श्रायु्ैद को निरुक्ति | शरोर उनका फ़ल दतप्रादुमाव |तन्दन्तरकत * २३ अरविनीकरुमार प्र [युग्म शरोर श्रयुम्म राति नदरा दका फल शर श्रिय प्राण खमे योग्य शरोर श्रयोग्य माष्टाज प्रा [पुटप द्द प्रा मोग्य श्रयोग्यस्वी$ च्छ धन्नन्तरो प्राण & | गभके उत्पच्रहयोनेका क्रम सुगत प्राण गमभौणयका स्यद््प ९५ गरन्यको श्रारम्भ ९९ | गभे चोयीखतत्व श्द मृष्टम | तन्वान्तर 1 कृतिका स्थ्ुप वि० १३ | परत्दहारके अथं तत्काल ४० पुरपोका साधम्यं ९४ | गृहीत गभवानोकान्ठण २० उनका येधम्यं ९४ | ङंपोकाऽत्तरकालीन लदण ९० प्रकृतित नाम १५ | उखि युचगभेयतोकानवयरः शुप" १५ [पेशो दीघ आकार षः सत्यादियुक्तं मनकेगु घ॒ ] उन नपृखक श्रादियो का रओोगणयुकतममनके गुथ १९ | लद 1 | तमोगुयु्त मनक श्प श्रोरभो गभकाप्रकृतिलक्णर- अरहेकार भ्रभिमानि १० | पु ब्राहार श्राचातं की ध्यापार ल्य | चेष्टा भेदश्नार् ३० उसो सोनप्रकारके कारय ?७ | गभेलत्तय ३० उसमे इन्द्रिये विपय ९७ | वृधु बाग्मटका कथन रर मदाभूतक गुथ १८ | शरोरको ठत्पत्ति समवायि प्रकृति सात १६ | कार्यान्तर (= विकार सोल २० |सन्तान्तर में दोप स्यष्पदेरे ` मनने गने गुयमेद २० दोय शन्दकी निर्क्ति इदे गमरत्पत्ति क्रम ९९ | ययुर स्वष््ष ३४ रजस्वलप्का लद ^ २९ |उन वायक नाम दे उमये नियम [उद्रानादिक के स्यान इनके वरनेमें दोष २२ [उनके कमं ६१ रुर | पित्त स्वर्प द्द

रणस्वलाक कृत्य

पिपिवे

पित्तोकरे नाम

पचकादि पित्तेके स्थान

उनङेकमं

कका स्वह कफेकि नाम करेदनादिरोके स्थान

डन स्थानेमिं गत कफ के 4

कम्मे घातु ब्दकी निरक्ति धातुग्ेज्ञि कम्मं रसणशब्दको निरक्ति रखका स्दुप

रखके स्यान

उसके कम्मं

रक्तक स्वप

उसका स्यान

मासक्ता स्यष््प

उख्के पेशो

मास पेशोयोकी खया उनमें धावागत कोष्रगत

गलेके ऊपरक्ती

माष पेये के कम्मं मेदस्वङ्प

उसका स्यान

दड्ीका स्वप अध्थियों को संल्या श्ा्ठागत शरस्य

बिप्य | अमाय स्वरुप ३६ | ध्लेष्मस्ष्प श्र ३६ | ग्रहणोके लघठण ३६ | श्रादार षके प्राकधिप्यमे

इ६£ | विेपता ४५

३2

४० ४? ४१ ४१ ४९ ४९ ४९ ४९

रख लोन्रकार्‌ से पिभागको प्र्र्ोता दे ४६ श्रोजद्पका ल्य ४४ शुक्रका स्वष्प शद कल्ीदयी सद॑ स्थिति ५६ गभे को उत्पन्न करनेवाले

शुक्रका लच्चैण ४६ शुक्रका स्थान ५६ उक निकलनेका मा ६० मुक्रके निकलनेशा का ६०

पसल दिं प्रा रस्थि ४६ | चेष्रावालो भोर स्थिर

गलेके ऊपरकी रस्थि अस्थियोका प्रयोजन मञ्जाका स्वष््प मज्जाका स्थान

ष्छो उत्पत्ति

| ्रातंवका स्वद्धुप &० ४र | गभ॑ग्रहण योग्य श्राव का ४३ | लक्षण ६० ४३, घातुर्वोके प्रलगगुण द१ ४३ | घालुवों के मल ६९ ४२े | उपधातु ६१ ४४ [च्राशय ६१ ४४ | कलाक स्वङ्प क्षर ४९ | चोसत ईद्‌ शण, म्म क्ष धश शगाटक ६३ ४९ | छातोके मम्भ ४५ | सन्धि दोप्रकास्को ७९ ४६ | गोघुमे प्रप्र ५? ४०, ग्रो उपर प्राद्र ७2 ४० | शिग ५२ ४० / स्नायुतरमे वयन में प्रयम ४० [सनका स्वद्प थेन ५०४

भावपरकाञ्च सटीकपूेलरुडके प्रथमभागका सचीप 1

व्विप्य शष चिप्य पृ हायपेेकोप्नायुत्रौकाषयैन०५ (म छोटकी स्नाथुगरोकयु ययन ७४ | वालको नन्मात्तरवि* न्ट श्वमनिर्योका एन ,* ५८१ |छच्चाके नियम ष्ट उनम उप्रको ५१ | हसकेनियमममयकरो्रव{चः< कंडरा ५० | टुग्यका लव्य ८६ उनमें हम्तपादगत =. ०० [उष रटति ८६ कंडपगदोधिरेप उत्पत्ति ०० | उसके श्रहपहोनिका स्ट र्च्‌ ५० [उसफे वटनेका छार ८८ श्रोत ७८ | कलम धघानका लषण ५६ तताल ८८ दुग्धे विगड़नेका कार्य ६१ कुश्च | चिगड़हये दुग्बका लप 2० रच्ज ८८ | उषी गोयनविधि ६० सौयन ८६ | गृद्ध दुग्धका लक्ण ३? संघात ४६ | घायका लष्ठ ६१ मोमन्त ५३ | निष्ट धायका लक्तप ६९ त्था ०३ | यालकेदुगधपानक्तेविचि ६१ श्र्भानिनो ^€ | अन्यथा विणा ६२ लोमश्रोर लोप्क्ुप ८० | श्रमिम॑षय ६९ भभा मासिक क्रम ८० | माता दधनष्ोने म॑ कोः दोषदः भिशेष फल ०१ | धायके मिलनेमे प्रकाण६९ गर्भ॑का प्रधम चंग ८२ | दालककाश्रत्नप्रायनं समयस्य गभमेका लोवनो पायान्तर्‌ प्र | उसको पसिच्यादि ६९ गभर का कार्ण शरोर |यालकको स्प्रभाधतेि &5 उपाय ९८५ | उस्र फयलादिका स० दुष्प तेमर्पकीवृद्धि९१ | वालफ श्दिको भ्रण &$ नख देगोकी सदावृद्धि २८१ |परकरति लक्षय क्ण श्चेतन चंग ९८५ | श्रनन्तरदेय कष्ट गभका्रात्त मलम्‌ होनि | भातृपदैे लद काप्य ८४ | जांगल लचत्ण धट गभंवती कृत्य ८६ | साघारण्देश्य लक्तण कष्ट प्रस्वमाष ८६ | उन्म याग्मटक्षा मत॒ मृत्तिका घरको आङ० ८७ | दिनाद्विचर्या [3 परनकरोष यालकनेधाली |उस्मेष्वस्यय्ना लद्द ३६, का लव ८७ | दिनचय्यौ उसका उपचा ८० वातनव्ते पवाद 409 सण ˆ ८० [सोलगरमदलको ९८९ दादका कृत्य

रोर पीलनजलको ‰०१ भोड़ा रंदतकि प्रयाहण षे मुबक्लाघेना १०६

पय ध्र

1

1 चिपय पृष

कटुरलादि नाय %०? [ग्र्रफाठदस्मेशरम्ितिरेतु

जन ११ | शोप्म) यजंनीय १२ वा्नोसा साफररना १०९ |श्र्रीप॑के फारत १२० शोका देखना १०९ | ्रध्यशनरा लक्पं कमसत १०२ | खमस दलाल ॥, श्भ्येग . ९०६ | मापंालतफे भोजने श्य्ीपं सषनयतिन १५६} होनिमे भोजना उपाप १९ खनटनेते गुप १४ | विनमेमि यनेका निषेध" १२१ स्नानक्ते गुप १०४ | चकमणके गुण 4 यदनकत पुश्रना १४ ¡ पगड्वाधार्यके गरुय १२९ वल््रघार्य १०४ पादाय धाप्ुय च? चन्दन लगति गुण ९०५ | दषथारण गुप 1) पुप्पादिचारण १०६ [दर्डधास्य रप ध्र श्ाभूपएका चार्य १०६ पालकोको सयारके गुण शत स्वादि घरं ` ९०६ | नवी मयाते दे गुप ध्र खड्{टकापरस्ना ९०० | हायोरतो सवारीके गुप श्ट . भोजनष्दिङे रण १५५ | सेचिको सधासोकेगुप शर रमार्दियेजते प्रारसा छान ¶०६ |घूपके गुप भोजन प्िदेगुए" १५८ |यास्सिकेणुप (+. भोभनके प्रघ्मलचप ण्ट |वुद्धग योगय ९९९ श्दकका मद्चण १०६ | ऋग्नकर गुण श्र दु्टषटुर्ोने के वासने |धूम्का रुण = श्र ब्रह्मादिक स्मप्प॒ १०६ | श्रादाप (+; भोजनादि क्रम १०६ |रापिचर्ग्पा श्छ मुए र्ना गुण ९१० व्यासोक्त पुख्मनान्तर गृात्विध नियर ‰० | लुचय्यां ~ भोज्या भोजन परि० ९१९ मुशरलोक्तं चरयल १६१ गष्कत्रादि्का धिदार १९९ | अंरूदककोा लष्टप = १६२ विपमायनक्रा स्वय १९१२ |रोगकरा लघय १३३ श्रकरानमे भोजनक्यि क] |कम्मेजतेग १६४ दोपमुकतमाचयेत्यच्च ये ११९ [दोपनगेग . करका इलाज , १९१ | कम्मं देष १४ तम्ल गुष्प १९६ | सष्च्यश्चम्य याप्य १६५ भोजनदे्रनन्तस्कीक्रिधा १९० |उपदूवका लव्य दिद सायके गुल ९९८ | मरिषटका लद्द श्ड्द दिनके यनक! गुप ११६ | ¶चिकित्फका लष्ठणं १२६

शरोरम्मी श्रन्र पे संर्यापन फाष्ण

व्विक्रिस्खारोचिि ११६।तेमको चायच्रद्वनाज

्ी

,

भावप्रकारा सटीकपूरयखगदके प्रथमभागका चीपत्

3३ पष करनेमें दप १२७ सगरे जानकर ओपन चाननं दोप १३० शग भोर श्रीपध के चान मेँ चिकित्साका फल चिकित्खाके जंग शद रागीका लक्तण ९६ व्विकिःसषकेमर्य शद चिकित्सके अयोग्य १४० टूलफा लकय =

उसकोयाचामंशकुनविचार १४९ दैष्यका लघ ९१

निपिदुिय ९४१ देका कम्मं १४९ "येदभेदमे शरा्रुमेद श्रागन्ुकद्तु ४४5 शरायुका विचार ` , ९४३ दौ श्रायुका लय" ४३

ल्प ्रायुका लष्ठ

विकित्सा प्रिधान फल १४६ पचार्कया लद्वण ९४० द्रष्य श्ण श्रोयदयदप प्रिमापा १४० द्घ्योको परोषठा ९४६ स्थभाव्रते दित ९९० स्थभ वक्ते श्रह्दित १५९

मपोग विरुद्ध ९९ श्रोप्थ पटप्सञेत ९५१ प्रप्िनि्प्व १५२

दष्यगरतपेचपदारयैकेकम्मे१५४

मुर्छा टु ९९४ छन्तयुक्तमय्रुररसगुय ९४१ म्लका गुप १५१

श्रतिगक्त ऋम्लक्ा गु ९९९ ५,

विष्य

| अतिरक्त कटुर्सका गुण श्ए६

१४६ १५६ १५९ १५० >

तिक्तरस्का गुण + श्रतितिक्त रसका गुण कपाय गृण

भरतिुक्त कपायका गु गृण

लघ्रादि गुख्वालेननि गप श्रामपान १५६ दोयं १६३ चिपाफ ९६३ शिपाकेकरे गुण ६४ प्रभाव १६४ डके नाम लच्ण गुप १६१ वषेडे के नाम एण १६९

श्रावलेकठे नम गुण श्दः विफलाने नाम लद्दण गुण एद

सोठके नाम गुण १.८ श्रटकके नाम गुणय १६६ पोपलके नाम गुण १६३ निस्वकते नाम गृण १७०

विकट नाम गुण १७० पीपलामूल नाम गु १०० चदतु्परक्रा ल्त गण ९५० चच्यके गय ९० गजपोपल के नाम गुण्य दि्कके नामरूप ९७९ पचकोल्का लच्वय गुण ९५९ पदट्पयया गृप , १०८१ अ्जवादन के नाप गण १७१ श्रजमेोद नते नाम गुणं १७२ खुखसानोमलवादनके.य श्ण स्यष शरोर स्पेदचीरेके

नाममुप श्छ ध्न्य न्यम गय १७३ मोफ सोया नाम गुण १७

लवयखारुप ९४ ह, रतिणक्त ल्क गुय ९५५ कटु गरष ष्ण

भेयी यनमेयो नामगृप ९७३ चदाना नगम गुष्द ९४ हके नाम गुव श्स्श

# लः घेषथ वपथ पुष १७४ |कुमुग्भ के नमगुय ९८४ खएसानो वचनास गुण ९४ | लाके मरय १८४ कुलिच्न नामगरुण श्त [हलदी के नामगुण श्छ चोवचीनो गुण १०४ |कपरदलदी नाम गुण ९१ दोन रोहयेरके नामगूप ९७१ | गनहलदो नाम गृण ९८१ वायिम के नाम गुण १०५ [दारदल्दो नाम गुण ९८४ टूम्बहफलङ नाम गख ९८ |रसवत्त नाम गृ ९८४ य्लोदयन को नाम गुण १७६ | बाजचोनाम गृण १०४ समूदरफेन ९०८ | चकोडनम ग॒ण श्ट ऋषटयमंका लदयगण ९८६ श्रत्तोखनाम गु १८६ लीवक पभक कीडत्पत्ति | लोधनामर गुप नाम लद््ण गुण १०७ |लदसननाम गु १८७ मेदा मामेद्वाको उत्पत्ति [पिश्रा्नाम गण ९७ नाम गृण १०० | भिलावानाम गृण १०४ काकोली ्षीरकासली की |भागनाम गुण १०४ ङत्पति लदण गुण १८८ |पोस्तनाम गुण श्व फदधिवृद्धि कौ उत्प्तिल |श्रफीमनाम गुण चण नाम गष १८८ | पोस्तदाना नाम गु १८ इनकी प्रतिनिचि ९०८ संयदनाम गय १३ मुल॒द्ट कषे नाम गुण १८६ | खर नम गुण १८६ कम्थोलाके नाम गख १७३ | पागानाम गृण १६ ऋमलतास कते नाम गुख १८६ |चिडन्वय नाम गु श: कटको के नाम गुण १०६ |र्योचलनाम गुप >) चिणयते के नाम गय १८० | चनापवार नाम गृष १६० इन्द्रयव नाम गुण ९८० |लघादार नाम गुप ९६ मयनफलकरे नाम गूथ ९८० | सण्जोष्वार नाम गु १६० दोनेटना के नाम गुय ११ | सृहागा नाम गय १६९ ते्वहोके नाम गुव €? | घारद्वय छाय हात्षफ मालकतट्नो के नाम गुण १८१ | लय + १६१ कटके नामर्ण ९८ | चकनाप्‌ गुप १६४ गोकरद्रूलके नाम शुख १८९ | कगुर्रादि चने ट्ट चोरके नामग्प ९८९ | कप्रके नाम गप १६९ कार्डासीगो के नामगू श्य चीनियासपर नामगुय १६९२ कायफलके नाम दुख ९८३ | कस्तररे नाम गुय १६२ मारणो नाम गुण | मृखकदाना नाम गृण ९६३ पाणये के नाम गुप ९८६ | गोरामावमरेद नाम दुष १६३ घरे नाम्‌ रृप ९८३ | दन्दननाम रए ल्द मनोठ के नाम गु ९४ | पोतयन्दन नान च्व १८३

गय

२१ कायनाम गष

भावभ्कारा सदीकरुयैगएडके प्थमभागका सूचीपत्र |

-- ~ -~------------~-- बब

षि विपय विपय "पष वेप 1 विषय टे नाम गन्यपटरर्‌ नाम गप रक्तवन्दमन ६३ |भोपक्ि नान गु , २० | सफेद लातभ्राकः ८. नम गुथ *\ २०३ [गय ^ एर मेघोतरृणनाम गण भर्‌ पतगनाम गुण ( ~ अगप्नोमगुष ९६४ |उपोकामेदमटेडस्नामगुप १०३ | वदडनाम ग॒, = ,९१३ | कुखनाम दए देवदधारनाम गृण १६४ | तालोसपव नाम गय २ण्४ | सोकासाद नाम गए १३] कतृणनाम गरष सै गय मधं १६४ |पीतलवीनी नाप गख सणध | कर्ते नाम गय, २१३ मतृ नाममू ति फेः शे दध्रे नौम गुण सपर तगरनाम गण शद | गन्यक्ोसिलौ नाम गृ २० | खफेदलालकनेर ष्श्ठे| दपर ९६५ पोलो नाम गुण २०४ | घसुम्के नाथ गर ९१४ मदद फे नाम गुप ररदं 1 ९४ |रगाड्ग्नामिगरख * स्र गष १८९ | पलवालु नाग २०४ | मिक नाम गृ . ९१५ र्गाड कार नाम्‌ पिदासोकन्व्‌ नाम शृण रर४ नाम |ललपपेवा नमग २०४ | पित्तपापडा नाम गय १४२ | विद तेकन्वं ना (पडतकयास ममम ०१ | मनप सख ` "= | वासन नाप मर रान नामेगुष २६। नामम्‌ # =: "म््नङ्को लनाम गय ९६० | चकयत्‌ के नामगूध २०९ | घकादन नाम गय नीम नाम गं १४ | दोनोखताष्प्ते श्िनास्ख नाम गय १६५ |प्राडनाम गृ ९० जलनीम नाम गुप = गृ ९€० |यलकमल के नाम गय २ण्द | देनिस्चनार नम गृण र्श्ट|गृ [पदि वभः ने। सदि शरखगन्य नाम गु २२४ छावी नामि मृष ९६० |९ति कपु एदि घमः २०६ | दोने। स्दिजना नमि 1 ~. नीले नामं गैः ९०६ | सफेद शेर नीलेएूलफी पाठा नाम गुय ५, लवग नाम गृ १६५ श्रय गडुश्यादि येः = वीपुरथो नाम गुण १६८ | गिलोयञत्पत्तिनाम गुण १२०६ | प्णुकन्त नाम गुप द्र मो पनाम युय ˆ २०० |मेडड़ो नाम गप २९० फालानितनेत नाम गृप पेद जरतो नाम १८८ [चेले नाम यु ०० |फेार नाम गुर २१० दनोद नान गुप पर्द [कुद्धो माम गु ९०७ | देने करंजना नाम गु २९० | लमालमाटा नाम भण रर : पा पा रः गुय ९१० |इन्द्रायय नामगुण एद + रण्ट ९१८ |नीननाम गु ^ ^ ९७ तेपात्तनाम गुण श्द्६| यग (0 गु गु मः किवाचने का नाम गृय नागकेषर नाम गुण ९६& | अर्नोनाम गय कण्ट किवाचनाम गप पविना प्रोत चमुप्नात्तका | छानापाठा नाम श. सोषिणोनाम लक्ण गरष १६६ भृत्‌ पवशरलकालगुय ९०६ प्चोलके च. वे नायमुए. २० टक्ते ग्‌ मुंडी जाभरन नाम मुय र्द चेतनम रंय २१८ [दानो छम नाम गुय॒ सीति ०६ |ललवेश नामं गुण २१६ | तालमद्वाना नाम गु " रट नलनलीगन्चद्र्यनापःयर०० | यनभांटानाम्‌ गुण २०६ पि (९ युषन्व्ाल नापर मुख २०० | दोनेकिटेलो नाम भुय ९०६ | मयुन्दृरफल नाम गु वीरपनाम रुग २०९ | सफेदकटेली नाम गथ २१० | लाट नाम गृण छार नाम मनाम गुप "२०१ गेष्ठद्ध नाम गव ९९० चतिव्रस्पिण नाम गुथ २२० | देनो पनमेव नाम गुण पड = 1. जटपमासोनाम मुए रणो लकष शण ९० | लदम॑यानाम गुण , ग्स् 1 नाम चालद्यड नाम गुण २०१ | दथमुलका लकय गुण २१९ | सोनाषेल नाम गुण 4 २९ ( मोानागम्मथानप्न गु्ठरण | घोचन्तो नाम गु २११ |कपाख नानगृद भ्रागस नासगूः कवर मम गुण णद | लनमूग नाम गुण २११ |वाखनामगृय ०२१ लोक नामगुय मदोऽसनी नाम युय क| वनदडदनाम गुद |नर्कट नाम गुव २१९ |चायमाना नाम जय॒ २६ मनप नाम्‌ रुख रद | छोवनोयगयक सचय २११ | मरपत नाम गुप सर | म्शडफलो नामगुख र्रर प्र्‌ नाम शु स्र सफेद शरोर लाल श्रण्डो |मूञ्जनाम मुप सर |किवाच नासय २२९$ ब्रा न्यम शुग

सस्थ॑मोयधष्ठो नीम कुव ०३१

भाववक सटीककासूतीपत्र। 2 £ चिष्य प्र ` विषय - | ^ पिप्य चिप्य [4 काकजघा नाम गुष"^ २२१ नामगुणः ` रणविलियापोपून नाम गख २४> नामगय ५4 नागपुरी फेनम गृण ररसमुद्र नात्र गुप प्ण गलर नाम गु , र्धः तमिस माम शण. २१५ मैटासागो नामु, स्दर देवार नान गुव नामगुण स्थर मृ्टमहा नामे गुण २५१ हंखपदरो "नाम गुव देर नषती नामगुण २४१ [पार नाम गष २8८ [रति वटादि वश्५॥ २५५ नामगह्नी नाप्रगुश -स{नेयारिनाम गृण षथधसिरिस नाम गु ग्ट मग्रादि फल्वगः॥ थध श्रमरटेल नाम गुण २६२ व्मःतोवेल के नाम गुण २४१ [ीप्टत्त पंदव्ल्कल का (राम के नाम गय रद पातानगरुी नाम गु. श्मेली नाम गुण ४९ |्वय गुण २४३ [भ्रमवरका ल््तणगुण ९५० द्दात नाम गुण रदेहेदिनी चुहानामगुय र्ध ्रामर्तगुटलीकेगुण २४९८ वटपत्री नाम गु ३३।यप्पा नाम गुण र४२|सानमेदनाम गुप सध (नयनपवकेगण २५७ घटप्रयो नामशुव देः मोनसरो नानगु् र४र|सलदरेनाम गण |्रम्याडा नाम गय २५४०, मष्ट नाम गुप सदे [वडीमोलसशी नामगुप छर [समनाम गृण २०३ राजाप्र नाम गृण २५० मर्ट्टी नात्र गुध षरे४ कयम्य नामगुण रषद < गृण (न ग्ण षत शव्बरध्यो नाम गुप २४ ककूर्जीनामगुय सुधर (व्रिज्ञयपार नाम गय २५० कटहल नामगुय श्र्पुषपे नानगुण ररे४[माननीनाम्‌ गुण रुण |षेद्नाम गय २५ [बदल नाम गयः स्ट लाल्‌ मे नामगुण रुड्थ(मधयी नान गुप ४३।सफेद खेटनाम गृण = २९० [कलनाम गृण २4६ दूमटे लज लु नाम गुणर देषो वेबडे देनाम गुण ०४३ [दन्द नामव २.१ (मृदुर नाम गृण २५६ दूयोके नापर गुड नामगृय २४३ गद्टितकर केनामगृण ९५१ नारियल नाम गुप २९६ प्रुत जग्ले करना गुंर१ वािकरार नाम गुण दर क्ोकर नामगुय ९९१ तस्वरून नामश्प ९५६ व्रह्म॑के नापर गुण २.१ |्रोकष नमु रण्डा नाम गय २५९।पदरुल्मनाम गय २.० "गपि न्ग एर€ (वापुप्प नाम गुण 1 नेजिभ्रा नाम गृण १न१ दोना गृ ९६० ह्र नाम गुण द्द |चिकटमर्याके नाम र| टगोटनाम गुप २५९ सुपारी नात्रगुष ९६० "देने, येषते नम गुण लु्दनाम गुण खध्र्जि नी नापर गुप स्र ताटनामगुप २६० सेने नाम गुण सदे७ मु दुन्दनान गुण २४९ तुन के नाम गृण स्वर साना गय घलपोपल नाम गुख ०.७ |त्िन7पुष्प नान गुण २४. [मोदपचनामयुप २४२।नलफन नमय द्य म्भो नामगूण ३७ [इपस्या नाम गु (्लाशनाम र्य ष्पद पचेल ठे नामग॒ख स्थ नागदोन नम गुप न्ड [ष्य नाम पणवमन नान युप २५३ केयनाम शय ९.१ रवेन नान मुप रदेन सेन्दुरिा नासगुप रए मोदरस वराम गुय २१६ नारमी नाम गय नकद्िकूनी नाम युप देत ्रगास्तपुप्पनामगय २४९ कटियमिमल नाम गृ २५३ [-न्दुनाम गृण +, ट्र कक्रान्दा नाम गुण ८-न दना लुनसौ नाम गुप ४८ |घवनाम गुण २५ (चना नमम गुव स्र मुद्य॑न नात्रयुप ९३ (क नाप्रगय यामिन नाम गप टतसननाम गप मृघाकरानी नम गप, षत दयन्‌ नामगूव कथ : गुण २४ ददटेश्रो नदरी ल्ामन मेष्य नाम गुप ₹-&वारो नाम गुथ र्ट [यु नामग्प २.४[नेषम $ एतिषड्दपादि मे. ३६ = एुष्यादि कने रुध्ट|बस्ना नाम गप २५४ रनम गुय २९ च्य पुप्प", 1 सद्< [शय वटग्रादि च्मे रष गी नप्म गप २८४ पोए वेक नत्तयश्धय २८३ कमलके नाम गुप, २३३ |वट नाम गय रथ्छचटापाटना नाम गु २२५ पने वरना नाम गु २३ ~ प्रटयने नाममगुषए " १३६ पोप्ल के नाम गण (क सिरीख नामगृप ९९९ नमगस

सघ नपचनगदि नम्‌ गुप २४०।पाप्खपोपन्‌ नयन गुण ९४>॥ 9

मो नानग्य्‌ =

२९५ दना कणेन्दपनाम गख

=

भावप्रकार सर्टीक का सूचीपत्र {~~~ = विप्य एषठ विषय 1. कषय (2) विष्य ` च्तिंजिनमगुण सू को उत्पत्तिनाम ल~ |व्रादूनाम गय ९८५|उनङे गृण ९६१ खिप्नी माम गु सऽ | घय गय +| खपरिरा नामगुख ष्म्भलालयान फे गप द्द कट नाम गुष ६४ | चोदीको उत्पन्न नाम ल~ |कसोमनाम गुप २९४ब्रोलोधान्यके लक्तणपन्टदे कमलाषटा-नाम गुण सद | दय गुण षध मेरठो नाम गण ६८४। छठी फे लत्तय गय | पिडा नाम गण ८८५ |ताम्रकी उ०नाम लण गुण ९७६ कदिनाम गृण स्५| मठी केना ९६ भंटनाम गुण सेद | गोगनाम लच्तय गुण = २०४ पटा माटी उत्पति ल- | उनके गृण ९६३ दन महुरं के नाम गुय रद | यसदनाम लकपगुव २०४ द्णनाम गय , मान्य ष्ट फाला नाम गुथ १८५ | सो यो उत्पतति नाम रकी निरुक्ति उनके नाम गर ६६ शह्टूत नाम गुण २९१ |गुख ल्य ०४ रत्रारानिष्पय २०६ गेल्के नाम गय लद्धेय २६४ अनाप्नाम गृण २८६ | सटकोड० नाम ल० गुए २०४ रीग्कि नाम लदप मण त्सं श्रय दिम्बरीधान्प ६४ यषुव्रार नामगुप २६ | सारलेादका लय गप ९७६ हते भम्मका गुण = शरोर उपे पयय २६४ निमेलो नामरुण ९८६ | ्ठन्तरलेदकष्नद गुण ९६५ पन्ने के नाम सन इने गुप ` २६४ दानाम गृण | मेड के लद गुण सथ्य यो नाथ मग्के गृण ६१ प्रज्ञटनाम गृण ६० | उपान ९०६ पुष्प के नाम मम उडद कतेगुण . ९६५ दयोदात नाम गुव | सोनामापो नाम गुण २७६|नीनम के नाम स्न्पुलोवियानमरुण पिंडसक्ूए नाम गुप ९६७ | छुपामाम्ये नाम गुप ९७०] गोमेद नाम पाद्यनीम गुप पटल वदाम नापर गु ६६८ | लोलया नाम ग॒ण वेट्य्यं नाम | मोटुनाम २०. पड सेबनाम गु २६८ | खपारश्रा गय सञ मेती नूम गण ममृप्नाम गुण ॥3 शअतफल नाम गुख २६८ |काणानम गुण < मगेकेनाम म्य पनेर नप्मर गृण " १६५ पोल्‌ नाम गृण रम दने पोतन के नाम गुप रदरोते गप स्न्मटर नामगण शष्ट नाम मुय द्म तिदूर नाम रुप ५९|कोनस किख यद्यो = [खेखाते नाम रु २९७ विज नाम गृण ६८ | शिना्ोत नाम गुण . हितहाता दहे रन] कुलयो नामगुय * ५६० मधुककडधी नाम गण कद | पारे की उत्पत्ति लक्षण | उपर्बका निष्धय ९८८ |तिननाम गुण ९६० देनो चम्योपे नाम मुख &<६| नाम गुप सऽ चिषे नाम लद्दणगुण सद्‌] अलसी नाम गृण २६८ नम्र नाम गुण २३६ | उप्सेकि लकणगण २८० वचनाकका लवण ग॒ 5६|तोसो नाम गप ९६८ मोखा नीम्बच नाम ट्ख स्र शिंगारिफनाम लद गृण ८८० हासिद्रिकका लदणम्रण ९८६| देने सरसो के नामगपष्द कमय नामु २७० | गन्धकं की उत्पात माम | शोरा्टिका लदटय गय २९६| दोने। राके नाम गण ष्ट इमलो नाम्‌ गुण >0 | ननद्दप गण ८१ मीगियिक्ा लचव > ८६ श्रथ घुद्चौन्ध श्ट मलत नाममु् ८०० [अभ्रक को उत्पति नाम कालक्कूटका लदय द्‌ कंगृनी नम गण ९६६ विपोमिल नापर गुण २७० | लक्तण गुण २८१ दयालादलका लय ३३० चोना नाम रण २६६ ˆ चतपम्ल प्रचल दा ल- | दप्तालकेनाम लष्ठ गरु बरह्धपुदका ल्प २३५] सावानाम सप १६ २०१ | मेनसिल नामगुख उर्पाव्पोका निष्ुपेख २३४ रेदि नामगण ~ इति परवरः युम कन्दु सेय) दति घात्वादि दमः ~ ६६९। गथ ॥-> (व ०१ | खहमानामटुय २८३ रथ धान्यं २६५|वासवीन नाम गृ र्ट पासुष्पदका वः॥ २८४ धान्य के भेद कुमुम्भनीज नाम गुप २0 धानुद्धाके ल्यद््य २०१ | खा प्प पध यपलिान्धका लच्एगुपरर१ टेषदथान माम अण ६०० यानाम इ्म्ड|यना के नात ३००

जिनीनाम गय न.

भावप्रकाश सटीक का सूचीपन्न 1 विप्रय | विष्य | विय प्र | विषय विपय पनेरानाम गुप र०0'हरहुर नाम गण दण्४दोनें पेठेके नाम गुख॒ ₹०अत्राल््‌ नाम गृण ३९९ इनमे नये पराको गणदेापर००शिरि आरि नाम गुण २०४ (लोकोनाम गण ३०७कदित्रा आलूक्ति नाम गृणर१९ इति घान्यवग, ३००मुदैपच नाम गुण ण४कडयं लोको नाम गुण ३०८विडाल््‌ नाम गण ९९ प्रथ शाकवग्ः॥ ३०९ग्रजवादन साग नाम गुप इणुचियातोरदै नाम गुण रे०८अरसदे नाम गृण श्र "ाकनिष्प्य ३०५चकवङ़्‌ नाम गृण ३०५।तोरौ नाम गण ८०८दोनेमूलो नाम गण ३९ शाकोतरिग्ण ३०९ सेड नामगुग ३०५,पदटोल नाम गृण सुपः नाम शृण ३१२ दोनो बषटु्वो नात गुण ३० १पित्तपापडा नाम गुण य्‌ नाम गुण ३०६कदलो नाम गुण एद पोदैनामगुप द०गिलोय प्च नाम गुण २०४ठेमपेमा नाम शण रण्डुमानक्ेच नाम गुण ३१३ देने मरके नाम दण इण्नकसोन्दी नाम गुण सणमृवहिजना नाम रय देशसुथनी नाम गुण ३९३ चवई नापर गुण ३ण्दचनेकासाग, नाम गुण रेश्वु्ेगनद्धोटा वडा ३१० दस्तिकयं नाम गुण ३१९२ ललचवगाद नामगुख \्ण्टकेराव नाम-गूप देण्डसफेद नाम गृण ~ ईशणकेज नाम गुण ३१३ पलकी नामगण इण्रसरसोखाग नान्न गुष नाम गण ३९०कखेष्ः नाम गुण ३९२ नरिवानाम गु ३०द्रथपुप्प शाक रण्धुवेखसा नान गुण ३१०परमच्रादि कदोके नागुण हेष पटु नामगु देण्धअ्रगस्तो फ़नकरे गु० रेण्धुबरिर््ा नाम गृण ३९९ वेदज शाक नाम गण ३९४ कलम्बोपाण नाम गुण ईणदेकेलेकेफूलका गुय ५५७ नामगुण 2९१] इतिक वे. नोनिया नामगुण ३० |सर्हिलनके पएरूलका गृण ३०७ लोका साग नाम गुण ३९१ देने चक्क नीमयुय ण्धूसिमलके फूनका गण रेण्णुगरथकद शाक ६११ चेषुना नाम्‌ गुण ___ ०५ फला नाम गण ३०४अय फ़लशाक इशक नाम गय 2११

भावभ्रकाशकते पू्वखर्डका सूचीपत्र

हितीयोभागः अथ मांसवभैः

णर विषय णषु विपय पृष विषय प्र उसरमेमासकेनाम ८९५ |प्रसद्ोको गणना गुप ३१० |अम्यिमि द्धागका गुय॒ ३९२ | कृद्धबाल फे माप्का दोप जागलकेलदप्रोरगुण ३१५ |कूलेरतोकगपना गुण इश [मेढे गुण & ~षडे।गृण ३९१ यम्यत्राट जागलजाति ३११ | प्लवोकौै गणना गुण ३१८ [टुम्बाकेगुय ३९३ | विपादिसे मृतके मासका श्रानरूपरा लकणं गृण. _ ३१५ | कोणस्योकौ गणना गृण ३९८ चदंगाय ३९४ दोप ३९१ छागलो कौं गणना विरि | पाद्धियोकी गणना गुण ३९८ | घोटके नाम गुण ३९४ मद्धलियमे रोहे ३९ गय २१६ |मर्य्तलयोके नाम गुण ३१६ |कूलेचयेमे्ंखका नामगु० सेर | सिलन्वा गुण ३९५ विलेशयेकी गणना गृणर१६ जागलादिये। के नाम गुण ३९६ मह्कनाम यु देर | मार गृण ६२६ गह।शर्धाङी गयना गुथ ९९६ | पतवियेोके नाम गु ६९६ | पादियेमं कुरा २२४ [ मोदिका ग्य स्य # ठि # समे ~ 4 (4 गी पूर्गोक्ो गणना गप ३९६ | उनविव्कितमे बटर आ० इ२९ | ततकाल हते माखका सौगी ग॒ण बिष्किंकी ग्यना गुण ३१७ परतुदोभने हरोत श्रादि इेदेर | नाम गुख २९ | लस युय ्रतुदोको यना गु ३१७ | पचिग्रड के रय ८२३। स्वयमृतकमाखकागणदेःपरे९ | खोरो यय एद

११ भर्मेत मप कवर गुय यम्ब गृण दंडेपे गुण चरटमो भुय पषा गप भष्द गुप मंते गुध टेप गण मफ़रपाट) गप

छट! मदलियेकि गुप तद्याटं मस्लियेमि

[111

मद्यलिये।के भंडेकेगुप मष मरददलिये।के गुण

दम्धमरम्प् गुण

युप प्राकर मराल व्थ

भावप्ररार्च सटीक का सुचीपत्र 1

.

५१ 0 + 4 0 4422424

4

| रम गण कार्जवडानाम गुप छरोव्डागप गमको चट उटदकी वडियां फोटटाते गुण एगदटी गु प्वाफ्किरच्छ गुप कटी नामगुए अद्रकवटिरा- पोरिया गुप

शा 4 < ^ 1 © 0

(1 ल्‌

[]

[

]

8 ~ 4 11

गरेण दे | गप्मममाना गु पटटूचयेपदं मदम्यचिेय | भ्रनन्तरमाम प्ररूपर शप स्स (भेषड गप

शमनन्तर कृताप्रव-

ठमपर अरन्नजामाधमप्रारर

शरोर प्दधषटोसागुप

पटिमिप्प

भदे साम प्रे माध

श्प दानक मनाम तोन गय शष्के मन्न गप भोयद्नाम गप स्णानामगय प्रन य्य दन्नं मानगुत शपभो नाम दप 1 नारद गाङः गय 61

1

> 7

भरनी गृण

णोम्य्रागुप 4

तलेष्टये मापा गुर

मोषगुद

| मरमयणाड गुह

म्रौमप्मगठ

शारपारथिधि

५1 द्रोटके दय

मम्प्ाद्पपरूगुव

फषुर्नानि गुप

एनी गव

| मानो गुप

सेवमाना गण

मोननाद्‌ गय पमस्‌ ग्व

स्य 1 (२६1 १६१, ष्श(परर् म्द

९,

८१ ४.1

1 1 #

4 4

[नि

॥।

4 + + =>

< ~

_ च्य __ | चिपय ण्ठ तिपय प्र [लेवी गुण -४? | ग्रज्रके जलकामेद ६४. सिर्न रण गोप उनके, ल० गुप `

> | सर्वत गप ~ ६४२। नदो “दे सलील ३३३ पन्नाकतेगुप २४३ गृ ३५१ ३३३। मलन गुद २४३ चोद्‌ प्रदस्य ल५ ग॒ ३५9 रेद४ | नाटकापन्ना गृण . ३४३ | भस्ने जलक्ालण्णुय ३४१ [4 1 छनियाकप्यद्रा ग्ण ९४३ | मम छन्‌ व्ल श्त ६५ स्थ |काजीकागृष ३४३ | तालायक्े ल० गुण ६५? देर | यासे गण ४४ | वाथरो के चण लण्गुए ६५१ तक्रयुद २४४ वृधं फे पानी क\ स०२ १९५१ दुग्ध गुप ४४४ | चोञज का लण्गुय ६५२ महे गुण रेथ्४| गे के पानेकरा लेण गुप ६५२ जयजेगनू कष गत ६४४ [दिकिर जन ल० शुष चछर

चने मलुका गुय

३३४ | चाये पतूका गप धेर २३६ | वहते गुद ६४५ इद: परोलोका गुण ६४५ ३५६ गए ३४५ | रोता गुद ४६ ३७ | उयो गृण ३४८ [= ध्रै गष ९४६ >:७| तिल्कुट गय ४६

सरन नात गृ ३४०

दाप्रलगुत ६४८ षतर्दाद्यगः४

ऋय पात्थिष; एानोफे नामश्रोरमगुप् उनक् भय खनमेषयस। लघे श्र गप

0

4

[१

म्‌ भा

1

4 ^ = +1

^ + 1१) (4 91

&

| |

४४.

छंदरके यणलण गुय इर वां चण्छे लण् गप धर श्रनन्तर हेभन्ताद्विकाप्न विगमे प्रहि चन

धिश्च +. ल्त यदप का लण ६४६ जन फी पान व्रि दरण श्रत जर पानद

विष्य ६५४४ णलपानफोम्रपिप्रयकरता ४४१४ प्रणम्य यन १५५ निन्दित चन ६५ दुय फान्दिषपि

फ्रेणनेका उप्मय ८५८

पोयेट्येजलफोपाकगिविः ५४

५॥ ©

नन्दात्‌ छ्लनक्ते मद उनम मेगा शोरमरुद्रफे छना ्लयद ३४१|येर्टु फे लनसाग्य

५? {न्नर छन लज {पाना ल्ट्प ग्य

49 (श ©

नि व्रयष्य ९४. श्रय दुग्धवगे.४ ४४६ टधे पाम नुद ०६४ भाय्छे दृष्ष्लागय ११६

वतप गपश्चगेप एए

६४८ वड यानी गाय ६४८ | दधी ग्द

६४६ , चाम गायकेटयलागय ६५०

६५४>

४४५) ररञ्प्यन सा ल० गुर ४" दनवने गुप चप ६५०

भावप्रकाश सटीक पूर्वलरदकेदित्ीयभागङा सूचीपत्र &

विपयं प्रष्ठ पिय धृष विग्य पृ दिप्य भोजन विशेष मनेगरय करा दि मिलेहुयेदहो | गोम गण दद | उनके ल० गुण ३०० पिथ २५० |कागुण ३३ | मामु , ३5० माच्िक का गुण ३५० भेखकेदूघका गू” ३५७ | सतमे दधि मोजननि- इति मू वगः ३७० | भरामर्कालण गण ७८ * करके दधवा गु० ६९७ |पघ ३६३ | गथ तेल वमे ३०० | घोद्र काल० गुप इण्ट मृगश्रदिभे दरूधणगु० ५७ | अनन्तर इतुविरेषते तिलकोष्वषप निष्पय २०० | पोतिक कालण्मुय = ३०८ मेडीदुघग्‌० ३५८ | विधि निषेध ३६३ | तिल तेल गुण 5०० | द्ाइका ल० गृण हथ घोडोके द्ध काण ७५८ | सप्मस्तुकाल० गुण ३६३ सरसे रे तेलुगु = +? | ्ाघ्यंकाल० गुण ६०8 उटनीके दूधकागु० दण्ट इति दधिवग॑ः इ६४ | तोरो तेल गण ६९१ शरोटुमलकालणगुध ३०६ छयिनोके दरुधकामू० ५८ | श्रथतक्वगं, ३६४ | अलसो तेल गुण ६०२ | दराल काल० गण ६५६ स्तरीदुग्ध गु° 5४८ | तक्र सेवन के निमित्त तक्र |कुमुभ तैल गण ३५२ | नवप्रराक मघु गुण ९७~ श्ारोप्यदुग्धकाणु० ६५८ | विषया ३६१ |पोस्तकषे तेलका गण ३०२ | ्रतल मधुका गुपाधिक्च शरोर पोरपकिलाटक्तीर मो ग्रादि केत कागु० इद | अंडी तेल गुण ३०२ | उष्ण का निपेध ३०६ शाकतकपिडमोरट चति तक्रवगः ३६६ |रालतेल गण ३०२ | मोम गुण ६८० ्नकालण्गु ` ३४६ | श्रय माखन यनः २६६ | सवं तेल गण २०३ | इतिमधघु वर्गैः ६८० मला्ैके गू” ३५६ | मान के नाण्ग० ६६६ | इति तेलवगं; ६०३ | भथ ईसयरगः ३०० मीठे टूधकाग्‌० ३०६ | सत्रे मानसा गुण ३६६ | गय सन्धान वग; ३०३ | शेष के ना० गुण ८० सेकदुम्ध का गु? ९६० वके मापन का गु० ३६६ | उनम फालोका ल० ३० | देखि मेद ६०४ दुधसेवनसमयवि तानेमाडन का गु ६६६ |लुादक का ल० गख ३०३ | पवेत पोंडा श्रादिे गुण ३०० मेष नोर गु ३६० |वासो मालन काए० ददद | सोवीर्काल० गय ३०३ | देखे रमक पदाय काग ३९१ निलये दूघकागुण ३६० | इति माघन घगेः ३६७ | ्रएनालका लगुण ३७४ | रावकालघ्पगुव ३८९ गायकदटूधकाग्रु9 ३६० | श्रथ चृतमः ३६७ धान्याम्ल का लण्गुय , ३७४ | खाडकाल० गरुण ३८३ निन्दित दुग्ध मु ६६१ |उस्मे घृत के ना० गु० ३६० |यिडाको काल गुण |गुदकफा ल० गुप इम्‌ इतिवुग्धगु9 ३६९ | गायके धुलका गुण इद | क्तं का ल० गृण ३०४ | पुराने गुडका ल०गुण इष श्रनन्तरददीकागू० ९६९ | अंसके घुतका ग॒० ६9 | सन्धान काल० गुण ३०४ | नयेगुडका ल० टु ३०८३ दचिमेद ३६९ | वकरो घृतका गु ६६८ | मदाका ना० ल० गृण २७४ | चीन का ल० गुण नण मन्द रावि दचिन्े उटनीके घृतका गु ६६८ | श्रषटका ना० ल० शण ३०५ | गु ङख्घका गुण लण्यृणा ६६१ | मेडके घुतका शुर द| सुरापानङालण्गुए >०५ | मधूकड का गृ रेन्थ मायके दहीका गप | स्वी घृतगुण इदः | वार्णीका ल० गुण ०५ | इति दखका गण ३०४ दोपतियेप शोर सेम वियेष |घोडीके चृततका गुण इद | दोनोसीघ फालण्यण ३५ | रय श्रनेकाथं नामव, ६९४ भसक्रविेष ३€९ | दधते धुतका गुप ३६८ | रासद काल० गुप = ६०६ उन्मदो भये यालेनाम रेष्४ भषको तोशय इध | हयिनी के घुतफा गुप ३६८ |नव पुण मव्यगुख पप्य |सोन शर्य बाले नाम॒ देव्ध यमरोकेदष्ठीकागुण रद |पुरानि घुतका० इर | मयकि गन्यदुरहोने वहत श्रयं चाले नाम॒ इन परुयेदुये दक्षे दीका [नवीन धृता शय ६८६ , कवडपाय ५० | अय मान पल्मिाषा गुण ३६९ | स्मै घृतन देनाचादिये ठख | इतिन्धानयम; ३०० | मागय मान वेमलापैक दूषक दद्धीका {फा चिषय ६६६ | श्रय मधुवे ३५० | कालिगमान्‌ ६० गख दे€् | इति चुतवगेः ३६६ | मघुके नाणगुप ३८० | इति मान परि भाण ६६१ निचोडे दद्ोकामुप | अव भषणं. ३६६ मधुक्ेभेद २०० | शरोयिये। का व्रिधान ३६१

१० भाव्रर सटीक पूरयलरडे दितीयु भागका सूचीपने ` म्नि छा -क्न्म्ा-च--- विप्य =^ ~ धिप्य 11 | विप्य

=-=

म्द्ररमपिधि &६? | उमष्यन्ष ४०३ दासेत्का कफष्टाटेवा 4 भरद छवद्ुल लनविचि ३६९ | मारण्योग्यद्धप्य ४०६ | प्रकार ४१२ | मवङप्रमोकोसाचारप हिम चिरि घ्र | उम्र प्रयोग्य ४०३ | गुदशिलाजीतकाग॒० ४१३ | श्ोघनविध्ि * धरर मन्धप्रिधि ३६९ | गोधन {पधि ४० | परागेको ्ोचनविधि ४१३ | उस्मेदियेय ध्र फांट विधि ३६९ | श्रद्ध चादोका दाप ४०६ मुर्नं ४१४ | शुद्टदपरसेक्षे्लग कम्क पिधि |उर्मेदटूमरा प्रकार ४०६ | उल्वंपतन ४१४ | गुप ४ैरर चुं परिधि २2९ | चादीकि भम्मराग्‌० ४०४ | ्धःपातन ४९४ | र्कोयोयनमार्पविधि ४९३ भाधना पिद 55 [माप्य योग्यलामर्‌ ` धण्छ मु्यदोपदर्थोधन टोग्ेदाप ४२३ एदटपारप्रिधि ३९४ | शरयोग्यताम्रमु ४०४ | धिधि ४१५ | शीरेकोगेाधनविचि धर्‌ टणप्ठोदक विधि ६६६ | गायनचिचि ४०४ | स्दोपषरयेदिप्र दरकमाप्यविदि ४२ घंर्पार पिदि ष्ट४ | ताप्रतो मारयविचि ४०४ | योघन पिचि ४१५ | मप्मरस्नेकोदुमसेषिधि ४२३ कय विधि 2४ |सायेको मम्मकागु” = ४०९ | परिकोमारययिचि ४१५ |दीरोकेभस्मकाुप ४२१ फाठेकीमानमाषा ६४ | गगकाभ्वङूपनिष्ुपपय ४० टमराप्रसार ४१६ | षाकोरवेकोश्ोधनमार् यन्वान्यक्त ३१ | श्रगु ठम्कादोय ४०६ | रमरा्प्कीवियि ४१० [पि धरर श्रये धियि ३९४ |रगक्तोमार्यदविधि ४०६ जिन्दरुरर्म + ४१० | विपोकोयोधनधिधि रध चटका विधि * ३६५ |राणके भम्मकागुप ४०६ मच्िनपातकोभिनि ४?८ | यचनाभजा लक्षण ४४ पत गरोपिधि ४६६ | सं भेजा शाधन ४०७ उपरमोकोभोचनदि० ४१८ | विपफोगोयन यिचि धरण म्यवद्दामाय ३5० | मोधेकमाप्य चिचि ४०७ उम्मेष्ठिगुलकोशोघन विके गुप धर एन्धिगेष &६० नागमम्मका मू ४०७ | छिंधि ४१८ | दपवि्पोके लवय मन्धान व्रिद्ध ६६० | चगृदुलेषहरा दाप ४८८ णुद रगिनकेगु० ध्श्ट गुप्यानिद््योकी्रधि ४२४ पामवकिमान० १९८ | लोक्‌) मार्पवियि ५० िगुलमरे पात निका धूततलमें पिगेष, ४९ मामान्यने श्रविधि ६६८ | लो्टमम्मा ४०६ |लनेपोयिधि ४१८ | स्नेदपान विधि भध धावे गोधन मरप उपधावूयेकिमारप ४०६ श्वगदुगन्यककादोय धरत | पृचभम्मं ' धे प्रचि ६६६। परमार ४०३ |घोधनयिि ४१६ | यमन पिचि धट दम्मभाग्पयोग्यमुषपं ३६६ श्गुद्धमेनामापोकादाप ४०६ यद्धगन्वषमेगुण ४१६ | पिरेवन चिधि ३१ भदयुषवेमा दोप १६६ (मारपथित्ध ४१०|्रुदुरभकफादोप ०१६ स्नेद्वम्यि विधि [० पू4ददोमाग्पदिद्ि ६६8 पामाफेकादिधन ४१० |दम्कीनाधन पिचि ४१६ | च्रादगदिश्ममे च्ण्टूमतप्ररार ४०० | माप्य ४१० |हम्कामार्य ४१६ | धिर स्ति ड्द युवपभस्मकानु> ४०० | खनङ्विगेयणु० ४7० | छान्याभ्ररुफो चिधि ४२० | निष्टदवसतिपिद्ि = ४३६ न्वेद प्रणाद ४०१ | लोनेयेयेडा यायन्‌ ४2० |चपररमस्मदगुए ४२० ठरवस्ति चिध्ि थर सर्पेदध चन्दन ¢ ४१० चणुदुहपतानादोप ४२० ४४२ पानु यम [0 ४११ | ठमकःमाप्पयिधि ४९० [नामनेनेफो चि कण मयर ००० | निनटुरकाप्नोचन = अ२९ गुदर्यतप्यमस्मदे [विरेचन नाम यण षटदन एम्ब ४३ | धदगुपा ४१९।गुप ४९१ [कृटदनाम ष्ट

(नि जिाजःतजे्यन ४१९ ुटुमेननिनङेदोष " ४१ [दूप्रपान , रेभ

भपप्यन्द्‌ 0 ४११ | दम्कोगोधनयिधि ४९१ [गरपारुदन शोर संघनन

-

छररियारू गोधन ४९ {विचि ६४१

मावधरकारा सटीक पू्रैवणडके दितीयभाग का सूचीपन्न १९१

चिप्य चिपय " विष्य ष्ठ विष्य ष्ठ उस्म ठनके भेद ४१९ [रजन विधि ४६५ | तन्त्रान्तरादिमें नेष | स्वस्थ।ल० ४० मरा ४१९ | लेखनीवटी ४९६ | परोच्ता ४०२ |दोपधातुमलेकोगिका कवल ४५९ | चन्द्रोदयावतिलेलनो ४९० | जिद्वापरेला ४० |निदान न्द ञ्लन ४१५२ |रोपणोवततिं ४२७ | मदपरोच्वा ४७ | वहुतवज् हुयेडनज्ञ स्वेदविधि ४५९ | स्नेहनीयं ४६० [ नाडोपरीचा ४७ | लकय लर तापस्वेद ४५३ |सक्षियालिखनी | रोगन्नानल्पादिदेतुका | ्रतिबृटुदोपमर्लोका छप्मम्बेद ४१३ |रोपपोरस त्रिया ४६० | लक्तय ४७४ | कंय ४८३ उपनाह स्वेद ४९४ | स्नेहनीरषत्रिया ४६८ |उस्मेहेतुग्याधियेक्ञ दापघातुमलङगे प्षयका दष्यस्ेद्‌ ४१५ | लेखनो ४६८ | चाने सप्राफ्ठिकाए्ल० श्छ | कारय = ४८३ पक्तान्तर ४१६ | रोपणं ४६८ | उस्केश्रोपाचिकमेद ४७४ | तो उनकेल० ४५३ मू्येतेल बिधि ४१६ | स्नेष्टनच॒णे भद | संप्रापरिव्याचिक्िचनाथं श्रोजद्तयकानिदान ४४ फंपिधि ४१द्‌ | प्रत्यञ्जन विधि | देतु ४० | हीगत्रोनवालेका लेपविचि ४१० |दुद्धिखादनोशलासा ४६६ | लचपकरालक्तण ४०६ | लच्तय " धनध श्रानेप ४५० | शरोपधसेवनकाल० ४६६ | उपयमका लद्वफ ४०६ | उदरसंफोच धत्थ रतष्य्र विचि ४४८ | प्रधमाल ४६६ | घातफाउपयम ४०६ | ोग्दोपघालुमन्तोका प्रसादनकम्मे ४२१ | ्वितीयकालं ४९६ | पित्तकाडपथम ४७७ | वधन ४९५ कल्पचिधि ४६९ | तृतीयकाल ४9० | फफकारपयम ४०० | तीणदेनिमेकारण ४९९ सेकधिधि ४६२ | चतुयंकाल ४७० | पित्तप्रकोपका कारय ४७८ | सुूतमतमेशरलल ्ार्चोतन धिवि | पंचमकाल ४९० | विदाही लक्तव ४०६ | चय "४ पिोविधि ४६२ | निस्त्रमोपथरागुण = ४७० | कफ्रकोपकरात्रारय = ४०६ | यलतयनिदान ४८० विडालक विचि ४८२ | सान्नभ्रोपधरागुण ४२० | रोगकरेेलुतेगका यलक्तयका लक्च० ४८० सपरेण चिचि ४८३ | चप्कोत्त श्रोपधलद्वण येचिल्य ४२० [ बलबद्धिनिदान ४० पुटपाक धि ४६४ | धिचि ४७१ |चीप्देषप घातुमले। यलायललक्षप ४०० तिक्तकद्रष् ४६५ | चिकिल्सायं तेगोकोपरोचा४०? | कीविकिरखा ४८० शति ४९०

मावपकाश पूरवेखरड भपाशकासहित

गजमुखममरघ्रवरंसिद्िकरंविघ्हतीरम्‌ गुरुमवगमनयनप्रदमिष्टकरीमिष्टदेवताम्बन्दे 9 स्फुरन्तनयोतवाहीकरािः कड्ष्कामिनीवक्रपद्मानिलिम्यन्‌ } मदानन्दमन्दारपुष्पायितभी.समु यन्‌विवस्वानरजवोनिदन्तु 9 वीरालियागोुवचन्द्रसूरिसरनुःसकालीचरणमिथानः तततर्किया काणएढयिकारासिद्धयेमावप्रकारविवरीवरीति २'जागर्तुसौजन्यसुपासमुद्रशरवादनिर्णिकतरात्मट्तनिः क्षमापतिरयेनविदान्यधायिमावपरकारास्फरणेप्रयासः सव देवताभों मे भ्रेए भणिमादि भ्रट सिदियों के देनेवाले तथा वि््ने। फे दरनेवाले श्रीगणेश सोर ज्ञानरूप नेन्नोकेदेनेयासे यरु तथः वांछित फलेदेनेवासे इष्यैवताके। नमस्कार करत॥१ 1 श्रयुर्वेदागमनेक्षमेणयेन्‌ भवदे * " भ्रथमलिखामितमहंनानातंवाणिसंटर्य २॥ शायुचेद भर्या वेयकशाखङा जिसमाति व्व मे भागमन हमा उसको मं भ्नेक शारो को देवकर प्रम क्िखतादटूं भरदुवर्दस्पसंक्षणमाद प्र ष्मादर्दिताहिवं व्याधेर्निदानं शमनं तथा * वियतेयत्रविदद्धिःस्मायुचेदउच्यते २॥ भायुर्ेदकातक्षणकदतिटे ॥। जिसमे जीवन के दितादित भर्पातु बद्राने घटनेवाली यस्त॒ तथा रोगो का निदान प्रोत्‌ भरपमोरपनि का कारण श्योर रोगो के नार का उपाय कदो वह परित फरफे भायुरयेद कदाजातत। दे ३५ पायुर्दस्यनिरकतिमाद्‌ श्मनेन पुरुपौयर्मादायुकिःदृति वेत्ति 1 तस्मान्मृनिवरेरे श्यायु्वद्दति स्यतः ॥% श्रीरजीवये्योगोजीवनमर्‌ तेनावच्चिन.्लायु> प्रायुरवदहारापुप्पाएयनापुप्पा रिच द्रन्वगुणकर्म्माणिनज्ञातवा तेपंसेवनत्यागाभ्यामारोग्येणायुर्िन्दतिनतेनवदेतुनापर स्पपप्यायुतिच

भावप्रकार स° पूर्वखरड 1

जि्ेदारा रुप आयुको पाता भोर लानताभी है उसे मुनिर्यो ने ्रायुर्वद कदा, शरीर रौर जीव इन दोनों का योग जीवन भीर उत्तसे विराहुभ्रा काल ग्ायु कटातदि, इस आयुके दिताहित द्रव्य गुण कमी को